October 22, 2026 10:14 pm

विवादित भूमि पर सीमांकन की जल्दबाजी? टेका मामले में राजस्व अमले पर उठे सवाल

ग्राम टेका की शासकीय वाद भूमि के सीमांकन का मामला, आवेदक ने तहसीलदार न्यायालय में आपत्ति दर्ज कर स्थगन की मांग की

पिथौरा – एक तरफ सरकार पारदर्शी प्रशासन और सुशासन के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं पिथौरा तहसील के राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विश्व साक्षरता दिवस के दिन ग्राम टेका स्थित शासकीय वाद भूमि के सीमांकन प्रक्रिया और नोटिस तामिली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हल्का पटवारी डायमंड साहू ने आवेदक को सुबह 8:44 बजे व्हाट्सएप पर सीमांकन नोटिस की पीडीएफ भेजी और 10:00 बजे मौके पर उपस्थित होने का फरमान थमा दिया। महज 76 मिनट की अल्प सूचना पर सीमांकन कराने के इस खेल पर अब प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं गर्म हैं।

कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर सोशल तामिली

उल्लेखनीय हो की छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 129 के तहत किसी भी भूमि के सीमांकन से पूर्व आवेदक एवं संबंधित चौहद्दी खातेदारों को कम से कम तीन से सात दिन पूर्व विधिवत लिखित नोटिस तामील कराने का प्रावधान है, ताकि सभी पक्ष अपने आवश्यक राजस्व अभिलेख जुटा सकें और मौके पर उपस्थित रह सकें। इसके विपरीत, पिथौरा राजस्व निरीक्षक मंडल द्वारा 7 सितंबर की तारीख में तैयार नोटिस को दबाकर रखा ।

8 सितंबर की सुबह आनन-फानन में मोबाइल के जरिए भेजा। किसी सरकारी नोटिस की इस तरह सवा घंटे पहले व्हाट्सएप डिलीवरी न केवल अवैधानिक है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी खुला उल्लंघन है।

आवेदक ने दर्ज कराई लिखित आपत्ति, स्थगित करने की मांग
पटवारी के इस अप्रत्याशित मैसेज के बाद आवेदक डालेश्वर पटेल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से तहसीलदार पिथौरा के न्यायालय में लिखित आवेदन पेश कर सीमांकन तत्काल स्थगित करने की मांग की। डालेश्वर पटेल ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया कि ग्राम टेका स्थित खसरा नंबर 386/1 एवं 386/2 (रकबा क्रमशः 0.05 व 1.94 हेक्टेयर) की भूमि पहले से ही गंभीर विवाद में है। इस भूमि के संबंध में उन्होंने कलेक्टर महासमुंद, तहसीलदार और उप पंजीयक पिथौरा के समक्ष विधिवत शिकायत दर्ज कराई है।
आवेदक ने बताया कि पूर्व निर्धारित पारिवारिक कारणों से वे रायपुर प्रवास पर हैं और सुबह 8:44 बजे मिले नोटिस पर 10:00 बजे उपस्थित होना असंभव था।

बड़े झाड़ के जंगल की रजिस्ट्री और सीमांकन की हड़बड़ी पर सवाल
मामले में सबसे दिलचस्प और संदिग्ध पहलू यह है कि उक्त भूमि ‘बड़े झाड़ के जंगल’ मद एवं विवादित श्रेणी में आती है, जिसकी रजिस्ट्री भी पूर्व में राजस्व विभाग की संदिग्ध भूमिका के चलते जांच के दायरे में है। ऐसे संवेदनशील प्रकरण में शासन के नियमों को दरकिनार कर एकतरफा पंचनामा तैयार करने की यह बेताबी किस दबाव’ या ‘मंशा’ का नतीजा है, यह बड़ा सवाल बन गया है।

तमाम छत्तीसगढ़ में जहां भू-राजस्व संहिता के नियम लागू होते हैं, वहीं पिथौरा तहसील में बैठे कारिंदों का यह रवैया दर्शाता है कि वे शासन के नियमों को ठेंगा दिखाकर अपना अलग ही ‘समानांतर कानून’ चला रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासनिक अधिकारी इस मनमानी पर संज्ञान लेकर जांच बिठाते हैं

इस मामले पर तहसीलदार मोहित अमला का पक्ष लेने उनसे संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया
आर आई शिवशंकर ठाकुर ने बताया की वे अभी बैठक मे है बाद मे जानकारी दूंगा कहा गया ।

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