October 22, 2026 10:07 pm

कांग्रेस का महिला-विरोधी चेहरा आया सामने, देश की महिलाएं कभी माफ़ नहीं करेंगी – स्वप्निल तिवारी

पिथौरा- देश की संसद में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने एक बार फिर कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, समाजवादी पार्टी एवं पूरे इंडिया गठबंधन की महिला विरोधी मानसिकता को उजागर कर दिया है। महिलाओं के अधिकारों और उनके राजनीतिक सशक्तिकरण के मुद्दे पर विपक्ष का यह रवैया न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विपरीत है।

भारतीय जनता पार्टी के जिला प्रवक्ता स्वप्निल तिवारी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राहुल गांधी और उनके तथाकथित ‘Anti-Women Alliance’ ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित न होने देकर देश की आधी आबादी के साथ खुला विश्वासघात किया है। यह कदम उन करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं पर आघात है, जो वर्षों से राजनीतिक भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में अपनी सशक्त उपस्थिति चाहती रही हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के प्रति उपेक्षा और दिखावटी सहानुभूति से भरा रहा है। दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए, बल्कि उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में उपयोग किया। आज जब देश में महिलाओं को वास्तविक अधिकार और अवसर देने की दिशा में ठोस पहल हो रही है, तब विपक्ष द्वारा इस प्रकार का विरोध उनकी नकारात्मक और संकीर्ण सोच को दर्शाता है।

तिवारी ने आगे कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को ‘नारी शक्ति’ के रूप में सम्मान देते हुए उन्हें सशक्त बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय ले रही है। चाहे वह राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात हो, आर्थिक सशक्तिकरण हो, या सामाजिक सुरक्षा—हर क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार संकल्पित है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह रवैया स्पष्ट रूप से बताता है कि वे महिलाओं के उत्थान के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि उनके अधिकारों को सीमित रखने की मानसिकता से ग्रसित हैं। यह लोकतंत्र के लिए भी चिंताजनक है, क्योंकि जब आधी आबादी के अधिकारों की अनदेखी होती है, तो राष्ट्र के समग्र विकास की गति भी प्रभावित होती है।

स्वप्निल तिवारी ने कहा कि देश की माताएं, बहनें और बेटियां अब पूरी तरह जागरूक हैं और वे अपने सम्मान और अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेंगी। यह विश्वासघात वे कभी नहीं भूलेंगी और आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से इसका सशक्त जवाब देंगी।

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