खालसा सेवा दल, युवाओं एवं बच्चों ने निभाई सेवा की परंपरा
पिथौरा, 18 जून 2026। सिक्ख समाज पिथौरा द्वारा सिक्खों के पांचवें गुरु, महान संत एवं शहीदों के सरताज श्री गुरु अर्जन देव जी के शहादत दिवस पर गुरुद्वारा साहिब पिथौरा में सुबह से विशेष दीवान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुबह श्रद्धापूर्वक कीर्तन, गुरुबाणी पाठ कर अरदास संपन्न हुई।

अरदास उपरांत गुरुद्वारा परिसर में छबील लगाकर राहगीरों एवं श्रद्धालुओं को ठंडा मीठा जल (शरबत) वितरित किया गया। इस सेवा कार्य में समाज के बुजुर्गों, बुद्धिजीवियों, युवाओं, खालसा सेवा दल के सदस्यों एवं बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया तथा गुरु साहिब के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने बताया कि श्री गुरु अर्जन देव जी सिक्खों के पांचवें गुरु और आध्यात्मिक जगत के शांतिपुंज थे। उनका जन्म 15 अप्रैल 1563 को पंजाब के गोइंदवाल में हुआ था।

स्वर्ण मंदिर का निर्माण उन्होंने अमृतसर में श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) के निर्माण को पूर्ण करवाया और शहर को एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बनाया
श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संकलन: उन्होंने आदि ग्रंथ में अपने शबद के साथ-साथ पहले के गुरुओं और अन्य महान संतों की वाणीयो को संकलित कर आदि ग्रंथ (वर्तमान श्री गुरु ग्रंथ साहिब) का ऐतिहासिक संकलन किए ।
मानवता के लिए बलिदान: धर्म और सत्य की रक्षा के लिए 1606 में मुगल बादशाह जहांगीर के आदेश पर उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं, किंतु उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और सर्वोच्च बलिदान देकर शहादत प्राप्त की।
इसी कारण सिक्ख इतिहास में उन्हें “शहीदों के सरताज” के रूप में सम्मानित किया जाता है।
कार्यक्रम के अंत में संगत ने गुरु साहिब के दिखाए मार्ग पर चलने तथा मानवता की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहने का संकल्प लिया।












